कल यहीं के एक पासआउट विद्यार्थी से बात हो रही थी, जो एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ के साथ बिहार के ही एक दूर-दराज के जिले में सामाजिक अभिप्रेरणा के कार्य में लगा है। उसका काम गांव में लोगों को शौचालय बनवाने और उसके प्रयोग को बढ़ावा देना है।
पिस्तौल-गोली सब तुम्हारी थी
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हमारा सिर्फ नारा था,
लाठी तुम्हारी थी।
हमारी कुछ मांगें थी,
पिस्तौल-गोली सब तुम्हारी थी।
हम तो शांति से चल रहे थे,
भगदड़ तुमने मचाई थी।
लाठी-डंडे ख...
1 दिन पहले
